मूल श्लोक
कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः ।आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
kaṭvamlalavaṇātyuṣṇatīkṣṇarūkṣavidāhinaḥ āhārā rājasasyeṣṭā duḥkhaśokāmayapradāḥ
अनुवाद
कटु अर्थात् चरपरे, खट्टे, खारे, अत्युष्ण, तीखे, रूखे, दाहकारक तथा दुःख-शोक और रोग उपजाने वाले आहार राजस मनुष्य को प्रिय होते है।
टिप्पणी
संस्कृत में कटु शब्द का अर्थ चरपरा और तिक्त का अर्थ कडुवा होता है। इसी के अनुसार संस्कृत के वैद्यक ग्रन्थों में काली मिरच कटु और नींब तिक्त कही गई है (देखो वाग्भट सूत्र॰ अ॰ 10)। हिन्दी में कडुए और तीखे शब्द क्रमानुसार कटु और तिक्त शब्दों के ही अपभ्रंश हैं।
— Lokmanya Tilak