मूल श्लोक
आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः ।यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
āhārastvapi sarvasya trividho bhavati priyaḥ yajñastapastathā dānaṃ teṣāṃ bhedamimaṃ śṛṇu
अनुवाद
प्रत्येक की रुचि का आहार भी तीन प्रकार का होता है। और यही हाल यज्ञ, तप और दान का भी है। सुनो, उनका भेद बतलाता हूँ।