भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १७.५ ·

English

मूल श्लोक

अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये तपो जनाः ।दम्भाहङ्कारसंयुक्ताः कामरागबलान्विताः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

aśāstravihitaṃ ghoraṃ tapyante ye tapo janāḥ dambhāhaṅkārasaṃyuktāḥ kāmarāgabalānvitāḥ

१७.५अध्याय १७ · श्रद्धात्रयविभागयोग२८ में से श्लोक ५

अनुवाद

परन्तु जो लोग दम्भ और अहंकार से युक्त होकर काम एवं आसक्ति के बल पर शास्त्र के विरुद्ध घोर तप किया करते हैं

— Lokmanya Tilak

अध्याय १७, श्लोक १७.५