मूल श्लोक
ओं तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः ।ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
oṃ tatsaditi nirdeśo brahmaṇastrividhaḥ smṛtaḥ brāhmaṇāstena vedāśca yajñāśca vihitāḥ purā
अनुवाद
(शास्त्र में) परब्रह्म का निर्देश 'ॐ तत्सत्' यों तीन प्रकार से किया जाता है। उसी निर्देश से पूर्वकाल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ निर्मित हुए है।
टिप्पणी
पहले कह आए है कि सम्पूर्ण सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्मदेव-रूपी पहला ब्राह्मण, वेद और यज्ञ उत्पन्न हुए (गीता. 3.10)। परन्तु ये सब जिस परब्रह्म से उत्पन्न हुए, उस परब्रह्म का स्वरूप 'ॐ तत्सत्' इन तीन शब्दों में है। अतएव इस श्लोक का यह भावार्थ है कि 'ॐ तत्सत्' संकल्प ही सारी सृष्टि का मूल है। अब इस संकल्प के तीनों पदों का कर्मयोगी की दृष्टि से पृथक निरूपण किया जाता है –
— Lokmanya Tilak