मूल श्लोक
एतव दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः ।प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
etava dṛṣṭimavaṣṭabhya naṣṭātmāno'lpabuddhayaḥ prabhavantyugrakarmāṇaḥ kṣayāya jagato'hitāḥ
अनुवाद
इस प्रकार की दृष्टि को स्वीकार करके ये अल्प-बुद्धिवाले नष्टात्मा और दुष्ट लोक क्रूर कर्म करते हुए जगत का क्षय करने के लिए उत्पन्न हुआ करते हैं,