मूल श्लोक
शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः ।गृहित्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śarīraṃ yadavāpnoti yaccāpyutkrāmatīśvaraḥ gṛhitvaitāni saṃyāti vāyurgandhānivāśayāt
अनुवाद
ईश्वर अर्थात् जीव जब (स्थूल) शरीर पाता है और जब वह (स्थूल) शरीर से निकल जाता है, तब वह जीव इन्हें (मन और पाँच इन्द्रियों को) वैसे ही साथ ले जाता है जैसे कि (पुष्प आदि) आश्रय से गन्ध को वायु ले