मूल श्लोक
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः ।मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
mamaivāṃśo jīvaloke jīvabhūtaḥ sanātanaḥ manaḥṣaṣṭhānīndriyāṇi prakṛtisthāni karṣati
अनुवाद
जीवलोक (कर्मभूमि) में मेरा ही सनातन अंश जीव होकर प्रकृति में रहने वाली मन सहित छः, अर्थात् मन और पाँच (सूक्ष्म) इन्द्रियों को (अपनी ओर) खींच लेता है (इसी के लिंग-शरीर कहते है)।