मूल श्लोक
यो मामेवमसंमूढो जानाति पुरुषोत्तमम् ।स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yo māmevamasaṃmūḍho jānāti puruṣottamam sa sarvavidbhajati māṃ sarvabhāvena bhārata
अनुवाद
हे भारत! इस प्रकार बिना मोह के जो मुझे ही पुरुषोत्तम समझता है, वह सर्वज्ञ होकर सर्वभाव से मुझे ही भजता है।