मूल श्लोक
इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयाऽनघ ।एतद्बुध्वा बुद्धिमान् स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
iti guhyatamaṃ śāstramidamuktaṃ mayā'nagha etadbudhvā buddhimān syātkṛtakṛtyaśca bhārata
अनुवाद
हे निष्पाप भारत! यह गुह्य से भी गुह्य शास्त्र मैंने बतलाया है। इसे जानकर (मनुष्य) बुद्धिमान अर्थात् बुद्ध या जानकर और कृतकृत्य हो जावेगा।
टिप्पणी
यहाँ बुद्धिमान् का 'बुद्ध अर्थात् जानकार' अर्थ है; क्योंकि भारत (शां॰ 248.11) में इसी अर्थ में 'बुद्ध' और 'कृतकृत्य' शब्द आए है। महाभारत में 'बुद्ध' शब्द का रूढार्थ 'बुद्धावतार' कहीं भी नहीं आया है। देखो गीतार॰ परि. पृ. 561
— Lokmanya Tilak