मूल श्लोक
उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेत्युदाहृतः ।यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
uttamaḥ puruṣastvanyaḥ paramātmetyudāhṛtaḥ yo lokatrayamāviśya bibhartyavyaya īśvaraḥ
अनुवाद
परन्तु उत्तम पुरुष (इन दोनों से) भिन्न है। उसको परमात्मा कहते है। वही अव्यय ईश्वर त्रैलोक्य में प्रविष्ट होकर (त्रैलोक्य का) पोषण करता है।