मूल श्लोक
उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा गुणान्वितम् ।विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
utkrāmantaṃ sthitaṃ vāpi bhuñjānaṃ vā guṇānvitam vimūḍhā nānupaśyanti paśyanti jñānacakṣuṣaḥ
अनुवाद
(शरीर से) निकल जाने वाले को, रहनेवाले को, अथवा गुणों से युक्त होकर (आप ही नहीं) उपयोग करनेवाले को मूर्ख लोग नहीं जानते। ज्ञान-चक्षु से देखने वाले लोग (उसे) पहचानते हैं।