मूल श्लोक
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् ।प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tamastvajñānajaṃ viddhi mohanaṃ sarvadehinām pramādālasyanidrābhistannibadhnāti bhārata
अनुवाद
किन्तु तमोगुण अज्ञान से उपजता है, वह सब प्राणियों को मोह में डालता है। हे भारत! यह प्रमाद, आलस्य और निद्रा से (प्राणी को) बाँध लेता है।