मूल श्लोक
तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् ।सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tatra sattvaṃ nirmalatvātprakāśakamanāmayam sukhasaṅgena badhnāti jñānasaṅgena cānagha
अनुवाद
हे निष्पाप अर्जुन! इन गुणों में निर्मलता के कारण प्रकाश डालने वाला और निर्दोष सत्त्वगुण सुख और ज्ञान के साथ (प्राणी को) बाँधता है।