भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १४.६ ·

English

मूल श्लोक

तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् ।सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

tatra sattvaṃ nirmalatvātprakāśakamanāmayam sukhasaṅgena badhnāti jñānasaṅgena cānagha

१४.६अध्याय १४ · गुणत्रयविभागयोग२७ में से श्लोक ६

अनुवाद

हे निष्पाप अर्जुन! इन गुणों में निर्मलता के कारण प्रकाश डालने वाला और निर्दोष सत्त्वगुण सुख और ज्ञान के साथ (प्राणी को) बाँधता है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १४, श्लोक १४.६