मूल श्लोक
सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः ।निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sattvaṃ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisaṃbhavāḥ nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam
अनुवाद
हे महाबाहु! प्रकृति से उत्पन्न हुए सत्त्व, रज और तम गुण देह में रहनेवाले अव्यय अर्थात् निर्विकार आत्मा की देह में बाँध लेते है।