मूल श्लोक
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते ।स गुणान्समतीत्यैतान् ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
māṃ ca yo'vyabhicāreṇa bhaktiyogena sevate sa guṇānsamatītyaitān brahmabhūyāya kalpate
अनुवाद
और जो (मुझे ही सब कर्म अर्पण करने के) अव्यभिचार, अर्थात् एकनिष्ठ, भक्तियोग से मेरी सेवा करता है, वह इन तीन गुणों को पार करके ब्रह्मभूत अवस्था पा लेने में समर्थ हो जाता है।
टिप्पणी
सम्भव है, इस श्लोक में यह शंका हो, कि जब त्रिगुणातीत अवस्था सांख्यमार्ग की है, तब वही अवस्था कर्मप्रधान भक्तियोग से कैसे प्राप्त हो जाती है। इसे से भगवान कहते है –
— Lokmanya Tilak