मूल श्लोक
समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः ।तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
samaduḥkhasukhaḥ svasthaḥ samaloṣṭāśmakāñcanaḥ tulyapriyāpriyo dhīrastulyanindātmasaṃstutiḥ
अनुवाद
जिसे सुख-दुःख एक से ही हैं; प्रिय-अप्रिय, निन्दा और अपनी स्तुति जिसे समसमान है; जो सदा धैर्य से युक्त है;