मूल श्लोक
उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते ।गुणा वर्तन्त इत्येव योऽवतिष्ठति नेङ्गते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
udāsīnavadāsīno guṇairyo na vicālyate guṇā vartanta ityeva yo'vatiṣṭhati neṅgate
अनुवाद
जो (कर्मफल के सम्बन्ध में) उदासीन-सा रहता है; (सत्त्व, रज और तम) गुण जिसे चल-विचल नहीं कर सकते; जो इतना ही मान कर स्थिर रहता है कि गुण (अपना-अपना) काम करते हैं; जो ड़िगता नहीं है अर्थात् विकार नहीं पाता है;