भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १४.२२ ·

English

मूल श्लोक

श्रीभगवानुवाच ।प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव ।न द्वेष्टि संप्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

śrībhagavānuvāca prakāśaṃ ca pravṛttiṃ ca mohameva ca pāṇḍava na dveṣṭi saṃpravṛttāni na nivṛttāni kāṅkṣati

१४.२२अध्याय १४ · गुणत्रयविभागयोग२७ में से श्लोक २२

अनुवाद

श्रीभगवान ने कहा: हे पांडव! प्रकाश, प्रवृत्ति और मोह (अर्थात् क्रम से सत्त्व, रज और तम इन गुणों के कार्य अथवा फल) होने से जो उनका द्वेष नहीं करता, और प्राप्त न हों तो उनकी आकांक्षा नहीं रखता,

— Lokmanya Tilak

अध्याय १४, श्लोक १४.२२