मूल श्लोक
अर्जुन उवाच ।कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
arjuna uvāca kairliṅgaistrīnguṇānetānatīto bhavati prabho kimācāraḥ kathaṃ caitāṃstrīnguṇānativartate
अनुवाद
अर्जुन ने कहा: हे प्रभो! किन लक्षणों से (जाना जाएँ कि वह) इन तीन गुणों के पार चला जाता है? (मुझे बतलाइए, कि ) वह (त्रिगुणातीत का) आचार क्या है, और वह इन तीन गुणों के परे कैसे जाता है?