मूल श्लोक
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते ।तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
rajasi pralayaṃ gatvā karmasaṅgiṣu jāyate tathā pralīnastamasi mūḍhayoniṣu jāyate
अनुवाद
रजोगुण की प्रबलता में मरे तो जो कर्मों में आसक्त हो उनमें (जनों में) जन्म लेता है; और तमोगुण में मरे ते (पशु-पक्षी आदि) मूढ़ योनियों से उत्पन्न होता है।