मूल श्लोक
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् ।तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṃ yāti dehabhṛt tadottamavidāṃ lokānamalānpratipadyate
अनुवाद
सत्त्वगुण के उत्कर्ष-काल में यदि प्राणी मर जावे तो उत्तम तत्त्व जानने वालों के, अर्थात् देवता आदि के, निर्मल (स्वर्ग प्रभृति) लोक उसको प्राप्त होते हैं।