भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १४.१३ ·

English

मूल श्लोक

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च ।तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

aprakāśo'pravṛttiśca pramādo moha eva ca tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana

१४.१३अध्याय १४ · गुणत्रयविभागयोग२७ में से श्लोक १३

अनुवाद

और हे कुरुनन्दन! तमोगुण की वृत्ति होने पर अँधेरा, कुछ भी न करने की इच्छा, प्रमाद अर्थात् कर्तव्य की विस्मृति और मोह भी उत्पन्न होता है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

यह बतला दिया, कि मनुष्य की जीवितावस्था में त्रिगुणों के कारण उसके स्वभाव में कौन-कौन से फर्क पड़ते है। अब बतलाते है कि इन तीन प्रकार के मनुष्यों को कौन-सी गति मिलती है –

— Lokmanya Tilak

अध्याय १४, श्लोक १४.१३