मूल श्लोक
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च ।तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
aprakāśo'pravṛttiśca pramādo moha eva ca tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana
अनुवाद
और हे कुरुनन्दन! तमोगुण की वृत्ति होने पर अँधेरा, कुछ भी न करने की इच्छा, प्रमाद अर्थात् कर्तव्य की विस्मृति और मोह भी उत्पन्न होता है।
टिप्पणी
यह बतला दिया, कि मनुष्य की जीवितावस्था में त्रिगुणों के कारण उसके स्वभाव में कौन-कौन से फर्क पड़ते है। अब बतलाते है कि इन तीन प्रकार के मनुष्यों को कौन-सी गति मिलती है –
— Lokmanya Tilak