मूल श्लोक
रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत ।रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
rajastamaścābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata rajaḥ sattvaṃ tamaścaiva tamaḥ sattvaṃ rajastathā
अनुवाद
रज और तम को दबा कर सत्त्व (अधिक) होता है (तब उसे सात्त्विक कहना चाहिए); एवं इसी प्रकार सत्त्व और तम को दबा कर रज, तथा सत्त्व और रज को हटा कर तम (अधिक हुआ करता है)।