भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १४.१० ·

English

मूल श्लोक

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत ।रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

rajastamaścābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata rajaḥ sattvaṃ tamaścaiva tamaḥ sattvaṃ rajastathā

१४.१०अध्याय १४ · गुणत्रयविभागयोग२७ में से श्लोक १०

अनुवाद

रज और तम को दबा कर सत्त्व (अधिक) होता है (तब उसे सात्त्विक कहना चाहिए); एवं इसी प्रकार सत्त्व और तम को दबा कर रज, तथा सत्त्व और रज को हटा कर तम (अधिक हुआ करता है)।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १४, श्लोक १४.१०