मूल श्लोक
सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते ।ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sarvadvāreṣu dehe'sminprakāśa upajāyate jñānaṃ yadā tadā vidyādvivṛddhaṃ sattvamityuta
अनुवाद
जब इस देह के सब द्वारों में (इन्द्रियों में) प्रकाश अर्थात् निर्मल ज्ञान उत्पन्न होता है, समझना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।