मूल श्लोक
यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः ।क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yathā prakāśayatyekaḥ kṛtsnaṃ lokamimaṃ raviḥ kṣetraṃ kṣetrī tathā kṛtsnaṃ prakāśayati bhārata
अनुवाद
हे भारत! जैसे सूर्य सारे जगत को प्रकाशित करता है, वैसे ही क्षेत्रज्ञ सब क्षेत्र को अर्थात् शरीर को प्रकाशित करता है।