मूल श्लोक
यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम् ।क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yāvatsañjāyate kiñcitsattvaṃ sthāvarajaṅgamam kṣetrakṣetrajñasaṃyogāttadviddhi bharatarṣabha
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! स्मरण रख, कि स्थावर या जंगम किसी भी वस्तु का निर्माण क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को संयोग से होता है।