मूल श्लोक
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
dhyānenātmani paśyanti kecidātmānamātmanā anye sāṅkhyena yogena karmayogena cāpare
अनुवाद
कुछ लोग स्वयं अपने आप में ही ध्यान से आत्मा को देखते हैं; कोई सांख्ययोग से देखते हैं और कोई कर्मयोग से।