मूल श्लोक
उपद्रष्टाऽनुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः ।परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
upadraṣṭā'numantā ca bhartā bhoktā maheśvaraḥ paramātmeti cāpyukto dehe'sminpuruṣaḥ paraḥ
अनुवाद
(प्रकृति के गुणों के) उपद्रष्टा अर्थात् समीप बैठ कर देखने वाले, अनुमोदन करनेवाले, भर्ता अर्थात् (प्रकृति के गुणों को) बढ़ानेवाले, और उपभोग करनेवाले को ही इस देह में परपुरुष महेश्वर और परमात्मा कहते है।