मूल श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते ।एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śrībhagavānuvāca idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ
अनुवाद
श्रीभगवान ने कहा: हे कौन्तेय! इस शरीर को क्षेत्र कहते है। इसे (शरीर को) जो जानता है उसे, तद्विद अर्थात् इस शास्त्र के जानने वाले, क्षेत्रज्ञ कहते है।