मूल श्लोक
मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी ।विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
mayi cānanyayogena bhaktiravyabhicāriṇī viviktadeśasevitvamaratirjanasaṃsadi
अनुवाद
और मुझ में अनन्य भाव से अटल भक्ति , 'विविक्त' अर्थात् चुने हुए अथवा एकान्त स्थान में रहना, साधारण लोगों के जमाव को पसन्द न करना,