मूल श्लोक
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः ।अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ye tu sarvāṇi karmāṇi mayi saṃnyasya matparāḥ ananyenaiva yogena māṃ dhyāyanta upāsate
अनुवाद
परन्तु जो मुझ में सब कर्मों का संन्यास अर्थात् अर्पण