मूल श्लोक
क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम् ।अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
kleśo'dhikatarasteṣāmavyaktāsaktacetasām avyaktā hi gatirduḥkhaṃ dehavadbhiravāpyate
अनुवाद
(तथापि) उनके चित्त अव्यक्त में आसक्त रहने के कारण उनके क्लेश अधिक होते हैं। क्योंकि (व्यक्त देहधारी मनुष्यों को) अव्यक्त उपासना का मार्ग कष्ट से सिद्ध होता है।