मूल श्लोक
यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः ।हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yasmānnodvijate loko lokānnodvijate ca yaḥ harṣāmarṣabhayodvegairmukto yaḥ sa ca me priyaḥ
अनुवाद
जिससे न तो लोगों को क्लेश होता है और न जो लोगों से क्लेश पाता है, ऐसे ही जो हर्ष, क्रोध, भय और विषाद से अलिप्त है, वही मुझे प्रिय है।