मूल श्लोक
सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मे भक्तः स मे प्रियः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
santuṣṭaḥ satataṃ yogī yatātmā dṛḍhaniścayaḥ mayyarpitamanobuddhiryo me bhaktaḥ sa me priyaḥ
अनुवाद
जो सदा सन्तुष्ट, संयमी तथा दृढ़-निश्चयी है, जिसने अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण कर दिया है, वह मेरा (कर्म-) योगी भक्त मुझको प्यारा है।