मूल श्लोक
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī
अनुवाद
जो किसी से द्वेष नहीं करता, जो सब भूतों के साथ मित्रता से बर्ता है, जो कृपालु है, जो ममत्वबुद्धि और अहंकार से रहित है जो दुःख और सुख में समान एवं क्षमाशील है,