मूल श्लोक
अर्जुन उवाच ।दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन ।इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
arjuna uvāca dṛṣṭvedaṃ mānuṣaṃ rūpaṃ tava saumyaṃ janārdana idānīmasmi saṃvṛttaḥ sacetāḥ prakṛtiṃ gataḥ
अनुवाद
अर्जुन ने कहा: हे जनार्दन! तुम्हारे इस सौम्य और मनुष्य-देहधारी रूप को देख कर अब मन ठिकाने आ गया और मैं पहले की भाँति सावधान हो गया हूँ।