मूल श्लोक
तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा ।अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tatraikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ pravibhaktamanekadhā apaśyaddevadevasya śarīre pāṇḍavastadā
अनुवाद
तब देवाधिदेव के इस शरीर में नाना प्रकार से बँटा हुआ सारा जगत अर्जुन को एकत्रित दिखाई दिया।