मूल श्लोक
ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः ।प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tataḥ sa vismayāviṣṭo hṛṣṭaromā dhanañjayaḥ praṇamya śirasā devaṃ kṛtāñjalirabhāṣata
अनुवाद
फिर आश्चर्य में डूबने से उसके शरीर पर रोमांच खड़े हो आए; और मस्तक नमा कर नमस्कार करके एवं हाथ जोड़कर उस अर्जुन ने देवता से कहा –