मूल श्लोक
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते ।इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ahaṃ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṃ pravartate iti matvā bhajante māṃ budhā bhāvasamanvitāḥ
अनुवाद
यह जान कर, कि मैं सब का उत्पत्तिस्थान हूँ और मुझसे सब वस्तुओं की प्रवृत्ति होती है, ज्ञानी पुरुष भावयुक्त होते हुए मुझको भजते हैं।