मूल श्लोक
एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः ।सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
etāṃ vibhūtiṃ yogaṃ ca mama yo vetti tattvataḥ so'vikampena yogena yujyate nātra saṃśayaḥ
अनुवाद
जो मेरी इस विभूति अर्थात् विस्तार, और योग अर्थात् विस्तार करने की शक्ति या सामर्थ्य के तत्त्व को जानता है, उसे निस्सन्देह स्थिर (कर्म-)योग प्राप्त होता है।