मूल श्लोक
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम् ।कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
maccittā madgataprāṇā bodhayantaḥ parasparam kathayantaśca māṃ nityaṃ tuṣyanti ca ramanti ca
अनुवाद
वे मुझमें मन जमा कर और प्राणों को लगा कर परस्पर बोध करते हुए एवं मेरी कथा कहते हुए (उसी में) सदा सन्तुष्ट और रममाण रहते हैं।