भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १०.९ ·

English

मूल श्लोक

मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम् ।कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

maccittā madgataprāṇā bodhayantaḥ parasparam kathayantaśca māṃ nityaṃ tuṣyanti ca ramanti ca

१०.९अध्याय १० · विभूतियोग४२ में से श्लोक ९

अनुवाद

वे मुझमें मन जमा कर और प्राणों को लगा कर परस्पर बोध करते हुए एवं मेरी कथा कहते हुए (उसी में) सदा सन्तुष्ट और रममाण रहते हैं।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १०, श्लोक १०.९