मूल श्लोक
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च ।अहमेवाक्षयः कालो धाताऽहं विश्वतोमुखः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
akṣarāṇāmakāro'smi dvandvaḥ sāmāsikasya ca ahamevākṣayaḥ kālo dhātā'haṃ viśvatomukhaḥ
अनुवाद
मैं अक्षरों में अकार और समासों में (उभयपद-प्रधान) द्वन्द्व हूँ; (निमेष, मुहूर्त आदि) अक्षय काल और सर्वतोमुख अर्थात् चारों ओर से मुखोंवाला धाता यानी ब्रह्मा मैं हूँ;