भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १०.३२ ·

English

मूल श्लोक

सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन ।अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

sargāṇāmādirantaśca madhyaṃ caivāhamarjuna adhyātmavidyā vidyānāṃ vādaḥ pravadatāmaham

१०.३२अध्याय १० · विभूतियोग४२ में से श्लोक ३२

अनुवाद

हे अर्जुन! सृष्टि मात्र का आदि, अन्त और मध्य भी मैं हूँ, विद्याओं में अध्यात्मविद्या और वाद करनेवालों का वाद मैं हूँ।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

पीछे 20 वें श्लोक में बतला दिया है, कि सचेतन भूतों का आदि, मध्य और अन्त मैं हूँ तथा अब कहते हैं, कि सब चराचर सृष्टि का आदि, मध्य और अन्त मैं हूँ; यही भेद है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १०, श्लोक १०.३२