भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १०.३० ·

English

मूल श्लोक

प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् ।मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

prahlādaścāsmi daityānāṃ kālaḥ kalayatāmaham mṛgāṇāṃ ca mṛgendro'haṃ vainateyaśca pakṣiṇām

१०.३०अध्याय १० · विभूतियोग४२ में से श्लोक ३०

अनुवाद

मैं दैत्यों में प्रह्लाद हूँ, मैं ग्रसने वालों में काल, पशुओं में मृगेन्द्र अर्थात् सिंह और पक्षियों में गरूड़ हूँ।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १०, श्लोक १०.३०