मूल श्लोक
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः ।कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadyapyete na paśyanti lobhopahatacetasaḥ kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ mitradrohe ca pātakam
अनुवाद
लोभ से जिनकी बुद्धि नष्ट हो गई है, उन्हें कुल के क्षय से होनेवाला दोष और मित्रद्रोह का पातक यद्यपि दिखाई नहीं देता,