मूल श्लोक
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ।पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
nihatya dhārtarāṣṭrānnaḥ kā prītiḥ syājjanārdana pāpamevāśrayedasmānhatvaitānātatāyinaḥ
अनुवाद
हे जनार्दन! इन कौरवों को मार कर हमारा कौन-सा प्रिय होगा? यद्यपि ये आततायी है, तो भी इनको मारने सम हमें पाप ही लगेगा।