भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १.३५ ·

English

मूल श्लोक

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

etānna hantumicchāmi ghnato'pi madhusūdana api trailokyarājyasya hetoḥ kiṃ nu mahīkṛte

१.३५अध्याय १ · अर्जुनविषादयोग४७ में से श्लोक ३५

अनुवाद

यद्यपि ये (हमें) मारने के लिए खड़े हैं, तथापि हे मधुसूदन! त्रैलोक्य के राज्य तक के लिए, मैं (इन्हें) मारने की इच्छा नहीं करता; फिर पृथ्वी की बात है क्या चीज?

— Lokmanya Tilak

अध्याय १, श्लोक १.३५