मूल श्लोक
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ।न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
nimittāni ca paśyāmi viparītāni keśava na ca śreyo'nupaśyāmi hatvā svajanamāhave
अनुवाद
इसी प्रकार, हे केशव! (मुझे सब) लक्षण विपरीत दिखते हैं और स्वजनों को युद्ध में मार कर श्रेय अर्थात् कल्याण (होगा ऐसा) नहीं देख पड़ता।