मूल श्लोक
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते ।न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
gāṇḍīvaṃ sraṃsate hastāttvakcaiva paridahyate na ca śaknomyavasthātuṃ bhramatīva ca me manaḥ
अनुवाद
गांडीव (धनुष्य) हाथ से गिर पड़ता है और शरीर में भी सर्वत्र दाह हो रहा है; खड़ा नहीं रहा जाता और मेरा मन चक्कर-सा खा गया है।