मूल श्लोक
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ।किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na kāṅkṣe vijayaṃ kṛṣṇa na ca rājyaṃ sukhāni ca kiṃ no rājyena govinda kiṃ bhogairjīvitena vā
अनुवाद
हे कृष्ण! मुझे विषय की इच्छा नहीं न राज्य चाहिए और न सुख ही। हे गोविन्द! राज्य उपयोग या जीवित रहने से ही हमें उसका क्या उपयोग है?